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जैव रासायनिक आनुवंशिकी

      जार्ज बीडल और एडवर्ड टेटम 1945 की बहुस्वीकृत परिकल्पना - "  एक जीन → एक एंजाइम → एक उपापचायी अभिक्रिया  "  - के अनुसार  जीव के प्रत्येक संरचनात्मक एवं क्रियात्मक लक्षण पर हीनी नियंत्रण होता है , क्योंकि  प्रत्येक उपापचयी अभिक्रिया एक विकर अर्थात एंजाइम द्वारा और प्रत्येक एंजाइम का संश्लेषण एक जीन विशेष द्वारा नियंत्रित होता है । 

जीवधारियों के आकृति एवं आकार

     सभी जीवो की अलग - अलग विशिष्ट आकृति एवं आकार  होते हैं । उन्हीं के आधार पर इनकी पहचान की जाती है । अर्थात विविधता जीवधारियों का शाश्वत गुण है ।